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कृषि कानूनों की वापसी: ‘जीत’ का जश्न मना रहे विपक्ष को कहीं सताने तो नहीं लगा हार का भय?

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न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी है। पीएम मोदी की इस घोषणा के बाद विपक्ष ‘जश्न’ मना रहा है। विपक्ष, खासकर कांग्रेस, कह रहा है कि आगामी चुनावों में हार के डर से पीएम मोदी ने कृषि कानूनों को वापस ले लिया है। मगर, कहीं ऐसा तो नहीं, विपक्ष, खासकर कांग्रेस, को ही अब हार का डर सताने लग गया है। क्योंकि आने वाले चुनावों में विपक्ष जिस मुद्दे को लेकर भाजपा पर हमला करने वाला था, मोदी सरकार ने एक झटके में उससे यह बड़ा मुद्दा छीन लिया है। अभी ‘हंसने’ वाला विपक्ष जानता है कि पीएम मोदी के इस फैसले का असर आने वाले चुनावों पर कहां और कैसे पड़ने वाला है।

कृषि कानून मुद्दे पर भाजपा से छिटकी थीं कई पार्टियां

पिछले कुछ सालों में कुछ पार्टियों ने एनडीए का साथ छोड़ दिया था। राजनीति में वैसे यह सब चलता रहता है। लेकिन इनमें कुछ पार्टियों ने तो कृषि कानूनों के विरोध और किसान आन्दोलन के समर्थन में उसका साथ छोड़ा था। इनमें शिरोमणि अकाली दल का नाम सबसे ऊपर है। आरएलपी ने भी कृषि कानूनों के विरोध में ही एनडीए का साथ छोड़ा था। अब विपक्ष को यह भय सताने लगा है कि कहीं ये पार्टियां भाजपा के साथ फिर न आ जायें।अगर ये पार्टियां वापस भाजपा के साथ आ गयीं तो चुनावी समीकरण बहुत बदल जायेगा।

पश्चिम यूपी में अब भाजपा फ्रंट फुट पर!

यूपी में बड़ी बढ़त लेने वाली भाजपा कृषि कानूनों की खिलाफत के कारण पश्चिम यूपी में बैकफुट पर थी। समाजवादी पार्टी ने तो जयंत चौधरी की पार्टी रालोद से गठबंधन कर लिया था ताकि इस क्षेत्र में फायदा उठाया जा सके। जाट, मुस्लिम, यादव समेत कुछ अन्य बिरादरियों के वोट का फायदा मिलने की उम्मीद सपा और रालोद को बन भी गयी थी, लेकिन अब सियासी समीकरण पूरी तरह से बदल जायेंगे। पश्चिम यूपी में भाजपा एक बार फिर से पहले की तरह ही आक्रामक होकर प्रचार कर सकती है।

पंजाब में भाजपा संग आ सकते हैं अकाली और कैप्टन अमरिंदर

कृषि कानूनों की वापसी का सबसे बड़ा असर पंजाब में ही दिखने वाला है। कृषि कानूनों के कारण माहौल भाजपा के पूरी तरह खिलाफ था। भाजपा यहां दुर्गति की स्थिति झेल रही थी। लम्बे समय तक एनडीए का हिस्सा रहा अकाली दल इससे बिदक गया था। कांग्रेस से अलग होकर नयी पार्टी बनाने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह भी उससे जुड़े नहीं थे। लेकिन कृषि कानूनों की वापसी के बाद माहौल पूरी तरह अलग होगा और नये समीकरण बनेंगे। पूरी संभावना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। इसके उन्होंने संकेत भी दे चुके हैं। यह भी सम्भव है कि चुनाव आते-आते अकाली दल भी भाजपा के साथ आ जाये। अगर ये दोनों बातें हो गयीं तो चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस और पंजाब में अपनी जमीन तैयार कर रही आप को बड़ा झटका लगेगा।

यह भी पढ़ें: पुलिसकर्मियों ने जज पर हमला कर हाईकोर्ट को किया नाराज, ‘न्यायपालिका पर हमले’ का डीजीपी से मांगा जवाब

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