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तालिबान के कब्जे में अफगानिस्तान,  देशी हों या विदेशी देश से निकलने के लिए बेकरार

तालिबान के कब्जे में अफगानिस्तान

बीस साल की लंबी लड़ाई के बाद अमेरिकी सेना के निकलने के कुछ ही दिनों के भीतर लगभग पूरे अफगानिस्तान पर फिर से तालिबान का कब्जा हो गया है। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद वहां अफरा-तफरी मची हुई है। रविवार सुबह काबुल पर तालिबान लड़ाकों की दस्तक के बाद राष्ट्रपति अशरफ गनी ने देश छोड़ दिया। वहीं देशवासी और विदेशी भी युद्धग्रस्त देश से निकलने को प्रयासरत हैं। इससे पहले अल जजीरा ने तालिबान कमांडरों के राष्ट्रपति भवन में होने के वीडियो भी प्रसारित किए थे। दर्जनों हथियारबंद लोगों को राष्ट्रपति भवन में टहलते देखा जा सकता था।

अशरफ गनी ने छोड़ा देश

अफगान राष्ट्रीय सुलह परिषद के प्रमुख अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने पुष्टि की कि अशरफ गनी देश से बाहर चले गए हैं। अब्दुल्ला ने कहा, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अफगानिस्तान को इस मुश्किल स्थिति में छोड़कर देश से चले गए हैं। अफगानिस्तान में लगभग दो दशकों में सुरक्षाबलों को तैयार करने के लिए अमेरिका और नाटो द्वारा अरबों डॉलर खर्च किए जाने के बावजूद तालिबान ने आश्चर्यजनक रूप से एक सप्ताह में लगभग पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया।

खून-खराबे को टालने के लिए देश छोड़ा – गनी

एक फेसबुक पोस्ट में गनी ने कहा कि उन्होंने खून-खराबा टालने के लिए देश छोड़ा है ताकि काबुल के लाखों लोगों की जान खतरे में ना पड़े। उन्होंने यह नहीं बताया कि वह कहां हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर कई स्थानीय लोगों ने उन्हें अराजकता में छोड़कर भागने वाला कायर बताया।

अमेरिका के सबसे लम्बे युद्ध का अंत

काबुल का तालिबान के नियंत्रण में जाना अमेरिका के सबसे लंबे युद्ध के अंतिम अध्याय का प्रतीक है, जो 11 सितंबर, 2001 को अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के षड्यंत्र वाले आतंकवादी हमलों के बाद शुरू हुआ था। ओसामा को तब तालिबान सरकार द्वारा आश्रय दिया गया था। एक अमेरिकी नेतृत्व वाले आक्रमण ने तालिबान को सत्ता से उखाड़ फेंका। हालांकि इराक युद्ध के चलते अमेरिका का इस युद्ध से ध्यान भंग हो गया। अमेरिका वर्षों से, युद्ध से बाहर निकलने को प्रयासरत है।

22 दिनों में तालिबान ने कब्जाया अफगानिस्तान

पिछले हफ्ते अमेरिका में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई जिसमें कहा गया कि 30 दिन के भीतर तालिबान राजधानी काबुल के मुहाने पर होगा और 90 दिन के भीतर देश पर कब्जा कर सकता है। इस चेतावनी के एक हफ्ते के भीतर और पहली चेतावनी के सिर्फ 22 दिन बाद तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता कब्जा ली है.

अफगानिस्तान से भागने के लिए भगदड़

रविवार को जब तालिबान के काबुल में घुसने की सूचनाएं फैलने लगीं तो शहरभर में भगदड़ मची हुई थी। अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के हेलीकॉप्टर अपने कर्मचारियों और नागरिकों को वहां से निकालने के लिए आसमान पर मंडरा रहे थे। काबुल के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जाम लगा हुआ था और सैकड़ों लोग देश से निकलने के लिए उड़ानों का इंतजार कर रहे थे। विमानों में सीटों को लेकर लोगों के बीच झगड़े भी हुए।

अफगानिस्तान के हालात पर UNSC की आपात बैठक आज

अफगानिस्तान के हालात को लेकर पूरी दुनिया में चिंता का माहौल है। अफगानिस्तान के हालात को लेकर भारतीय समय के मुताबिक शाम साढ़े सात बजे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक होने वाली है। इसकी अध्यक्षता विदेश मंत्री एस जयशंकर करेंगे। रूस की तरफ से इस बैठक की मांग की गई थी। परिषद के राजनयिकों ने रविवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस परिषद के सदस्यों को राजधानी काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद के ताजा हालात से अवगत कराएंगे। विदेश मंत्री एस जयशंकर पहले से ही न्यू यॉर्क में मौजूद हैं। इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए भारत की अध्यक्षता में होने वाली सुरक्षा परिषद की यह बैठक बेहद अहम हो जाती है.

अमेरिकी नीतियों पर सवाल

अमेरिका की नीतियों को लेकर अब अमेरिका के भीतर भी सवाल उठने लगे हैं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यह अमेरिका की सबसे बड़ी हार है। हालांकि अमेरिका विदेश विभाग ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है। विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा है कि अमेरिका अनंतकाल तक अफगानिस्तान में नहीं रह सकता था। उसे बाहर निकलना था। अमेरिका ने अफगानिस्तान की फौज को खड़ा करने में पूरी मदद की, लेकिन अगर उन्होंने लड़ाई नहीं लड़ी तो इसके लिए अमेरिका को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

काबुल से 129 यात्रियों को लेकर दिल्ली पहुंचा एयर इंडिया का विमान

भारत  ही नहीं दुनिया के तमाम देश अफगानिस्तान में अपना दूतावास बंद कर अपने कर्मचारियों को वापस बुला रहे हैं। भारतीय दूतावास के कर्मचारियों और वहां रह रहे 129 भारतीयों और अन्य यात्रियों को लेकर विमान भारत पहुंच चुका है, वहां से लौटे यात्रियों का कहना है कि वहां हालात बहुत खराब हैं।

भारत के लिए कितना खतरा है अफगानिस्तान में तालिबान?

अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी भारत के लिए फिलहाल कोई बड़ा खतरा भले ना दिखे, लेकिन आने वाले दिनों में ये एक बड़ी मुसीबत बन सकता है। कश्मीर को लेकर पाकिस्तान जो नापाक साजिशें भारत के खिलाफ रच रहा है उसमें वह तालिबान का इस्तेमाल कर सकता है। ये हर कोई जानता है कि तालिबान पाकिस्तान के हाथों की कठपुतली ही नहीं उसी की पाली पोसी जमात है। पाकिस्तान ने ही तालिबान को हथियारों की ट्रेनिंग से लेकर हर तरह की मदद दी और अब वो आने वाले दिनों में तालिबान को भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर सकता है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि अशरफ गनी के राष्ट्रपति रहते तालिबान सरकार से बात नहीं करेगा। दरअसल, पाकिस्तान चाहता है कि तालिबान का सत्ता पर कब्जा बना रहे ताकि तालिबान के जरिए वह भारत विरोध की फसल बोता रहे।

यह भी पढ़ें: ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ भारत में, बौखलाहट पाकिस्तान में, फैसले पर जतायी नाराजगी

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