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Jharkhand स्थापना दिवस 2016 का घोटाला जांचेगा एसीबी, सरयू राय के बाद सीएम हेमंत को भी आयी भ्रष्टाचार की बू

Jharkhand Foundation Day Scam

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

2016 में झारखंड स्थापना दिवस को यादगार बनाने का मामला अब पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के गले पड़ गया है। बच्चों की लाखों की संख्या में गिफ्ट बांटने के साथ गायिका सुनिधि चौहान के रंगारंग कार्यक्रम से राज्य का ‘पारा’ बढ़ाने  वाले पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की मुश्किलें अब एसीबी बढ़ायेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एसीबी को आदेश दिया है कि 2016 में झारखंड राज्य स्थापना दिवस के मौके पर सिंगर सुनिधि चौहान का जो कार्यक्रम हुआ और स्कूली बच्चों के बीच टी-शर्ट, मिठाइयां और टॉफियां बांटी गयीं (नहीं बांटी गयी), उनकी जांच कर बताये कि इसमें क्या-क्या घोटाला हुआ है। मामला 2016 का है। तब रघुवर दास मुख्यमंत्री थे और यह ‘सारा कुछ’ उनके मुख्यमंत्रित्व काल में हुआ था। वैसे इस मामले में झारखंड उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका भी विचाराधीन है।

सरयू राय ने उठाया था मामला

रघुवर दास के पीछे ‘हाथ धोकर पड़े’ जमशेदपुर विधायक सरयू राय ने ही 2016 में झारखंड स्थापना दिवस समारोह में गड़बड़ियों का मामला विधानसभा में उठा उठाया था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इन गड़बड़ियों को सही मानते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से जांच कराने की बात भी कही थी। जो भी हो, अब चूंकि उस कार्यक्रम की जांच एसीबी करने जा रहा है, ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की परेशानियां निश्चित रूप से बढ़ेंगी।

सुनिधि चौहान ने स्थापना दिवस बनाया था ‘यादगार’

2016 में झारखंड स्थापना दिवस को यादगार बनाने के लिए पार्श्व गायिका सुनिधि चौहान को बुलाया गया था। आर्चर्स एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के मार्फत कार्यक्रम के लिए 44 लाख 27 हजार 500 का कोटेशन दिया था। इस खर्च के अलावा 10 लाख 94 हजार 781 रुपए अतिरिक्त खर्च भी दिखाया गया था। सरकार की तरफ से बताया गया था कि कलाकारों के ठहरने, भोजन, वाहन और एयर टिकट मद में लगभग 11 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च हुए थे। इस राशि का भुगतान रांची के तत्कालीन उपायुक्त द्वारा किया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की अध्यक्षता में 9 नवंबर 2016 को राशि भी आवंटित की गयी थी।

बच्चों को बांटे ही नहीं गये टी-शर्ट, टॉफी?

2016 में 13 से 15 नवंबर तक राज्य स्थापना दिवस के कई कार्यक्रम आयोजित किये गये थे। इन कार्यक्रमों में  लाखों स्कूली बच्चों के बीच टॉफी, टी-शर्ट बांटने का भी कार्यक्रम शामिल था। इस कार्यक्रम में गड़बड़ी का आरोप यह है कि बगैर टेंडर निकाले करोड़ों रुपये के सामान की खरीदारी कर ली गयी। और तो और, बच्चों के बीच गिफ्ट बांटने की भी औपचारिकता पूरी कर ली गयी। यानी राज्य के 9000 स्कूलों में टॉफी व टी-शर्ट बंटे ही नहीं, लेकिन कागजों में इन्हें बांट दिया गया।

सरयू राय का आरोप

विधायक सरयू राय का आरोप है कि स्कूली छात्र-छात्राओं के बीच वितरण के लिए टॉफी की आपूर्ति लाला इंटरप्राइजेज जमशेदपुर ने की थी, वहीं पांच करोड़ रुपये के टी-शर्ट की आपूर्ति का काम कुड़ू फैब्रिक्स लुधियाना को दिया गया था। लेकिन हकीकत यह है कि राज्य के 9000 स्कूलों तक ना टॉफी पहुंची और ना ही टी-शर्ट, लेकिन इनका भुगतान पक्का है।

यह भी पढ़ें: Jharkhand: मुख्यमंत्री हेमन्त ने राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में कई विषयों पर किया विचार-विमर्श

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