समाचार प्लस
Breaking देश फीचर्ड न्यूज़ स्लाइडर

ज्ञानवापी पार! अबकी बार कुतुब मीनार! मथुरा की ‘जेल’ से नंद गोपाल भी होंगे मुक्त?

Cross of knowledge! This time Qutub Minar! Will Nand Gopal also be free from Mathura's 'jail'?

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

वाराणसी की अदालत से ज्ञानवापी को लेकर सकारात्मक खबर आने के बाद अब देश की निगाहें दिल्ली के कुतुबमीनार और मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर लग गयी हैं। दो अलग-अलग अदालतों में आज इस पर सुनवाई है।

दिल्ली के साकेत कोर्ट में कुतुबमीनार कैंपस में पूजा की इजाजत से जुड़ा मामला लंबित है। इस मामले पर पिछली तारीख पर खुद को पक्षकार बनाने की मांग करने वाले महेंद्र ध्वज प्रसाद के वकील कोर्ट नहीं पहुंचे थे, जिसके कारण सुनवाई टल गई थी। इस अर्जी में शख्स ने आगरा से मेरठ तक की जमीन को अपनी पुश्तैनी जमीन बताते हुए कुतुबमीनार पर अपना अधिकार जताया था। बता दें, दिल्ली स्थित कुतुब मीनार परिसर में दो मस्जिद हैं- कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद और मुगल मस्जिद। मुगल मस्जिद में नमाज पर रोक लगाई गई है जबकि कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद में देवी-देवताओं की मूर्तियां होने का दावा करते हुए यहां पूजा की मांग की गई है।

वहीं, श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही मस्जिद ईदगाह को लेकर वर्षों पुराना विवाद है। मामले से एक याचिका कोर्ट में पहले से ही दायर है, जिसकी सुनवाई को 13 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया था। सोमवार को उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की तरफ से कोई नहीं पहुंचने के कारण जिला जज ने सुनवाई के लिए 13 सितंबर की तारीख तय की। ईदगाह इंतजामिया कमेटी की तरफ से तनवीर अहमद और श्रीकृष्ण जन्मभूमि की तरफ से मुकेश खण्डेलवाल व विजय बहादुर सिंह मौजूद थे। मथुरा की दीवानी अदालत में सोमवार को एक नई याचिका दायर कर मीना मस्जिद को स्थानांरित करने का अनुरोध किया गया था। याचिका में दावा किया गया है कि इस मस्जिद का निर्माण कटरा केशव देव मंदिर की जमीन पर किया गया है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि की कहानी यूं है- मान्यता है कि केशव देव मंदिर का निर्माण 5 हजार साल पहले हुआ था। मान्यता के अनुसार कृष्ण के पौत्र वज्रनाभ ने जन्मभूमि मंदिर का निर्माण कराया था। 400 ई. में चंद्रगुप्त विक्रमादित्य ने इस मंदिर का पुनरुद्धार कराया। 1017 ई. में लुटेरे महमूद गजनी ने मंदिर पर हमला कर इसे ध्वस्त कर दिया। 1150 ई. में मथुरा के राजा द्रुपद देव जनुजा ने मंदिर निर्माण कराया। यह मंदिर 16वीं सदी में सिकंदर लोधी के द्वारा नष्ट किया गया। 125 साल बाद राजा वीर सिंह बुंदेला ने चौथी बार मंदिर का निर्माण कराया। अंतिम बार 1658 में औरंगजेब ने केशव देव मंदिर तोड़कर वहां मस्जिद बनाई तब से श्रीकृष्ण जन्मभूमि और ईदगाह विवाद चला आ रहा है।

यह भी पढ़ें: सच में JDU को लग रहा झटका या BJP कतर रही पर! नीतीश की पार्टी में तोड़-फोड़ जारी

Related posts

Fight against Omicron : विदेश से झारखंड पहुंचने वाले पॉजिटिव मिले तो होंगे क्वारंटाइन, Omicron को लेकर गाइडलाइन जारी

Manoj Singh

World Meteorological Day 2022: जानें विश्व मौसम विज्ञान दिवस का महत्व और कब हुई थी इसकी शुरुआत

Sumeet Roy

झारखंड में कोरोना की मार 3500 के पार, 1316 नये मामलों से राजधानी रांची में हाहाकार

Pramod Kumar