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देश भर में जेलों में 3.71 लाख विचाराधीन कैदी बंद, झारखंड की जेल में 17103 कैदी

SANJAY SETH

रांची: सांसद संजय सेठ (MP SANJAY SETH) ने लोकसभा में यह सवाल उठाया था कि झारखंड समेत देशभर में कितने विचाराधीन कैदी जेल में बंद हैं. इस सवाल के जवाब में सरकार ने जाकारी देते हुए बतया कि देश भर में जेलों में 3.71 लाख कैदी बंद हैं, जिनमें झारखंड की जेल में 17103 कैदी बंद हैं।

सांसद संजय सेठ ने पूछा था सवाल 

सांसद श्री सेठ ने भारत के कारावास में विचाराधीन कैदियों के साथ सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए उठाए जाने वाले कदम के बारे में सवाल पूछा था। सांसद ने यह भी पूछा था कि 5 से 10 वर्षों से अधिक समय से कारावास में रह रहे विचाराधीन कैदियों के संबंध में सरकार क्या विचार कर रही है?

“राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ऐसे आंकड़ों को संग्रहित करता है” 

जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्र ने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ऐसे आंकड़ों को संग्रहित व संकलित करने का काम करता है। कानून की उपयुक्त प्रक्रिया का पालन करने के बाद न्यायालयों के आदेश के अनुसार विचाराधीन कैदियों को कारागार में रखा जाता है। कारागार में बंद व्यक्ति राज्य के विषय हैं। कारागार कैदियों का एवं प्रबंधन राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। जो सामाजिक दृष्टि से पिछड़े कैदियों सहित सभी कारागार कैदियों के लिए सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने हेतु उपयुक्त नीतियों को तैयार कर उनका कार्यान्वयन करने के लिए सक्षम है।

“गृह मंत्रालय ने विचाराधीन कैदियों के मुद्दे के  समाधान को लेकर की है पहल” 

उन्होंने उत्तर देने के  क्रम में  कहा कि गृह मंत्रालय ने देश की जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों के मुद्दे का समाधान करने के लिए विभिन्न पहल की है। केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि विचाराधीन कैदियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए उपाय करने हेतु राज्य और संघ राज्य क्षेत्रों को कई दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को आदर्श कारागार मैनुअल के अंतर्गत कानूनी सहायता पर एक अध्याय दिया गया है। जिसमें विचाराधीन व्यक्तियों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं, कानूनी बचाव, वकीलों के साथ साक्षात्कार, सरकारी खर्चे पर कानूनी सहायता के लिए प्रावधान किए गए हैं। इसके अतिरिक्त किसी विचाराधीन कैदी को उसके लिए निर्धारित की गई अधिकतम कारावास की अवधि की आधी अवधि की सजा काट लेने पर, उसे जमानत पर रिहा करने का भी प्रावधान किया गया है।

“शुरू हुई प्ली बारगेनिंग की अवधारणा”

केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि प्ली बारगेनिंग का एक नया अध्याय जोड़ कर प्ली बारगेनिंग की अवधारणा भी शुरू की गई, जो प्रतिवादी और अभियोजन पक्ष के बीच विचारण पूर्व बातचीत की सुविधा प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त उन कैदियों की पहचान करने में विचाराधीन कैदी समीक्षा समिति भी सहयोग करती है। उच्चतम न्यायालय के निर्देशों पर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नालसा ने मानक प्रचालन प्रक्रिया तैयार की है। गृह मंत्रालय द्वारा यह सभी राज्य और संघ राज्य क्षेत्रों को भी परिचालित की गई है। इसके अतिरिक्त जेलों में लगभग 1091 विधिक सेवा क्लीनिक स्थापित किए गए हैं, जिन्हें पैनल में शामिल विधिक सेवा अधिवक्ताओं और प्रशिक्षित प्राविधिक स्वयंसेवकों के द्वारा संचालित किया जाता है।

‘झारखंड में 17103 विचाराधीन कैदी हैं बंद ‘

गृह मंत्री ने बताया कि वर्तमान स्थिति के अनुसार देश भर की जेलों में 371848 विचाराधीन कैदी बंद हैं । वहीं झारखंड में 17103 विचाराधीन कैदी बंद हैं । सबसे कम लक्षद्वीप में महज दो विचाराधीन कैदी बंद हैं, वही पड़ोसी राज्य बिहार में 44187 विचाराधीन कैदी जेलों में सजा काट रहे हैं।

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