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Mumbai Attack 26/11: अमर शहीद तुकाराम ओंबले जिनकी वजह से जिंदा पकड़ा गया था पाकिस्तानी आतंकवादी कसाब

tukaram omble

न्यूज डेस्क/ समाचार प्लस – झारखंड-बिहार

Mumbai Attack 26/11: आज भारतीय संविधान दिवस है। भारतीय संविधान दिवस पर ही 2008 में पाकिस्तान समर्थित एक सुनियोजित हमला मुम्बई पर किया गया था। पाकिस्तान समर्थित किया गया यह आतंकी हमला भारतीय इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में अंकित है। लेकिन एएसआई तुकाराम ओंबले जैसे वीरों की अमर शहादत भी यहां अंकितहै।

जो यह बताती है कि 1947 में स्वाधीनता संग्राम की लड़ाई हमने यूं ही नहीं जीती थी। तुकाराम की शहादत को देखकर ही हमें स्वाधीनता के अपने अमर बलिदानियों के दिलों में देश के जज्बे का अहसास हो आता है। कैसे जज्बा रहा होगा उन अमर शहीदों का जज्बा जो देश के लिए हंसते-हंसते कुर्बान हो गये थे। एएसआई तुकाराम ओंबले ने भी तो यही किया था। तुकाराम ने गोलियों से छलनी होकर भी आतंकवादी कसाब को जिंदा पकड़ा था। उनके प्राणों ने भले शरीर को छोड़ दिया, पर तुकाराम ने कसाब को नहीं छोड़ा। कसाब के जिन्दा पकड़े जाने से ही भारत यह प्रमाणित कर पाया कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ है।

मुम्बई में 1983 के सीरियल ब्लास्ट के बाद 2008 के उस हमले ने मुम्बई ही नहीं, पूरे देश को हिला दिया था। मुंबई में हुए आतंकी हमले को 13 वर्ष पूरे हो गये हैं। आज के ही दिन 2008 में समुद्र के रास्ते पाकिस्तान से आये 10 आतंकवादियों द्वारा देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में खूनी खेल खेला गया था। इस हमले में कई निर्दोष मारे गये थे। इन आतंकवादियों में सबसे खूंखार आतंकवादी अजमल कसाब था। कसाब उन आतंकी हमले में अकेला ऐसा पाकिस्तानी आतंकी था जिसे जिंदा पकड़ा गया था। हमले के दौरान आतंकी कसाब को जिंदा पकड़ने के लिए काफी कोशिशें की गयी थीं। लेकिन बार-बार वह चकमा दे रहा था। आखिर में मुंबई पुलिस में बतौर सहायक इंस्पेक्टर तैनात रहे तुकाराम ओंबले ने सिर्फ एक लाठी के सहारे उसे पकड़ लिया।

मुंबई की डीबी मार्ग पुलिस को रात करीब 10 बजे सूचना मिली कि हथियारों से लैस दो आतंकियों ने सीएसटी में यात्रियों को भूना डाला है और सड़क पर एक गाड़ी की मदद से आतंक मचा रहे हैं। सूचना मिलते ही 15 पुलिसवालों को डीबी मार्ग से चौपाटी की ओर मरीन ड्राइव पर बैरीकेडिंग करने के लिए भेजा गया। पुलिस को देखकर आतंकियों ने अपनी गाड़ी को बैरीकेडिंग से 40 से 50 फीट पहले ही रोक दी और यू-टर्न ले लिया, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी के कारण आतंकी भाग नहीं सके और चारों तरफ से घिर गये।

पुलिस सभी आतंकी को जिंदा पकड़ना चाहते थे, लेकिन आतंकियों ने फायरिंग कर दी और पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की जिसमें एक आतंकी मारा गया और कसाब ने मरने का नाटक शुरू कर दिया। उस समय तुकाराम ओंबले के पास सिर्फ एक लाठी थी और कसाब के पास एक एके-47। ओंबले ने कसाब की बंदूक की बैरल पकड़ ली थी। उसी समय कसाब ने ट्रिगर दबा दिया और गोलियां ओंबले के पेट और आंत में लगीं। ओंबले वहीं गिर गये, लेकिन उन्होंने अपनी अंतिम सांस तक बैरल को थामे रखा था ताकि कसाब और गोलियां न चला पाये। आखिरकार आतंकी अजमल कसाब जिन्दा पकड़ा गया।

मरणोपरांत अशोक चक्र सम्मान

ओंबले ने जिस तरह खूंखार आतंकी को जिंदा पकड़ने में मदद की, उनकी बहादुरी को देखते हुए भारत सरकार की ओर से ओंबले को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था।

यह भी एक सम्मान, मकड़ी को मिला तुकाराम का नाम

एक मकड़ी को 26/11 हमले के हीरो तुकाराम ओंबले का नाम दिया गया है। दरअसल, नयी प्रजाति की एक मकड़ी पायी गयी थी। इसी मकड़ी को शहीद तुकाराम ओंबले का नाम दिया गया है। नयी प्रजाति की मकड़ी को अब आइसियस तुकारामी के नाम से जाना जाता है।। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पहली बार मकड़ी के नाम (आइसियस तुकारामी) का जिक्र रिसर्चर्स की एक टीम द्वारा प्रकाशित एक पेपर में किया गया था।

Mumbai Attack 26/11

 

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