ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए अब केवल ऑनलाइन परीक्षा पास करना ही काफी नहीं होगा, बल्कि सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों की बेहतर जानकारी भी जरूरी होगी। केंद्र सरकार ने ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत लर्निंग लाइसेंस के लिए सुरक्षित ड्राइविंग से जुड़े ऑनलाइन पाठ्यक्रम की परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम अंक 60 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने की तैयारी है। हालांकि, यह अभी प्रस्तावित बदलाव है और इसे अंतिम नियम नहीं माना जाना चाहिए।

ऑनलाइन परीक्षा में बढ़ेगी पासिंग मार्क्स की सीमा

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में संशोधन के लिए मसौदा जारी किया है। इसके मुताबिक, सुरक्षित ड्राइविंग से जुड़े ऑनलाइन पाठ्यक्रम की परीक्षा में पास होने के लिए उम्मीदवारों को अब पहले की तुलना में अधिक अंक हासिल करने होंगे। फिलहाल इस परीक्षा में 60 प्रतिशत अंक लाना जरूरी है। प्रस्ताव के अनुसार, इसे बढ़ाकर 75 प्रतिशत किया जा सकता है।

इस बदलाव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लर्निंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले लोगों को यातायात नियमों, सड़क संकेतों और सुरक्षित वाहन परिचालन की पर्याप्त जानकारी हो। इससे केवल औपचारिक रूप से परीक्षा पास करने के बजाय सड़क सुरक्षा से जुड़े विषयों को गंभीरता से समझने पर जोर दिया जाएगा।

30 मिनट का होगा सुरक्षित ड्राइविंग पाठ्यक्रम

प्रस्तावित नियमों के तहत सुरक्षित ड्राइविंग से जुड़ा ऑनलाइन पाठ्यक्रम कम-से-कम 30 मिनट का होगा। इसमें यातायात संकेतों, सड़क पर वाहन चलाने के नियमों, दुर्घटना होने की स्थिति में चालक की जिम्मेदारी और वाहन चलाते समय जरूरी दस्तावेजों जैसी जानकारियां शामिल होंगी।

मंत्रालय का उद्देश्य ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया को केवल परीक्षा तक सीमित रखने के बजाय आवेदकों को जिम्मेदार चालक बनने के लिए तैयार करना है। सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं को कम करने के लिए यातायात नियमों की जानकारी और उनका पालन करना बेहद महत्वपूर्ण है।

लाइसेंस में नाम-पता बदलने का शुल्क खत्म करने का प्रस्ताव

मंत्रालय ने ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी कुछ सेवाओं को आसान बनाने के लिए भी प्रस्ताव रखा है। इसके तहत आधार के माध्यम से सत्यापित ऑनलाइन सेवाओं के अंतर्गत कुछ चुनिंदा सेवाओं पर शुल्क में छूट दी जा सकती है।

मसौदे में ड्राइविंग लाइसेंस में नाम और पते में बदलाव के लिए लगने वाले शुल्क को समाप्त करने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके अलावा, लाइसेंस में दर्ज विवरण में संशोधन के लिए किए गए आवेदन पर 15 दिनों के भीतर निर्णय लेने की बात कही गई है।

यदि किसी आवेदन को खारिज किया जाता है, तो संबंधित प्राधिकरण को अस्वीकृति का कारण बताना होगा। इससे आवेदकों को अपने आवेदन की स्थिति और उसे अस्वीकार किए जाने की वजह जानने में आसानी हो सकती है।

पहचान और पते के प्रमाण के लिए स्वीकार होंगे कई दस्तावेज

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, पहचान, आयु और निवास के प्रमाण के तौर पर आधार कार्ड, पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र, ई-राशन कार्ड और जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज स्वीकार किए जा सकेंगे। इससे पात्र आवेदकों को दस्तावेज संबंधी प्रक्रिया पूरी करने में सुविधा मिल सकती है।

इसके साथ ही नए जारी होने वाले और नवीनीकरण किए जाने वाले ड्राइविंग लाइसेंस को फॉर्म-7 के तहत लैमिनेटेड या पीवीसी कार्ड के रूप में उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

क्या अभी लागू हो गया है नया नियम?

ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े इन बदलावों को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मंत्रालय ने इन्हें मसौदा नियमों के रूप में प्रस्तावित किया है। संबंधित पक्षों से मसौदे पर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। इसके लिए 30 दिनों की अवधि निर्धारित की गई है।

इसलिए उम्मीदवारों को 75 प्रतिशत अंक की नई सीमा, शुल्क में छूट और अन्य प्रस्तावित बदलावों को तत्काल लागू नियम नहीं मानना चाहिए। अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कौन-कौन से प्रावधान किस रूप में लागू किए जाएंगे।

कुल मिलाकर, प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के साथ सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यदि ये प्रावधान लागू होते हैं, तो लर्निंग लाइसेंस के आवेदकों को ऑनलाइन परीक्षा की तैयारी अधिक गंभीरता से करनी होगी