रांची। झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा 2025 यानी 14वीं JPSC में कथित अनियमितताओं का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। परीक्षा प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई होने जा रही है।

याचिकाकर्ता हरिशरण देवगन ने परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की CBI से स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ मामले की सुनवाई करेगी।

103 पदों पर होनी है नियुक्ति

14वीं JPSC परीक्षा के जरिए राज्य में 103 पदों पर नियुक्ति होनी है। हालांकि, विवाद के बीच JPSC ने अगले आदेश तक मुख्य परीक्षा (मेंस) स्थगित कर दी है।

OMR शीट को लेकर उठे सवाल

याचिका में 19 अप्रैल 2026 को हुई प्रारंभिक परीक्षा की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। परीक्षा का परिणाम 2 जुलाई 2026 को जारी हुआ था। विवाद का एक प्रमुख आधार कथित तौर पर एक अभ्यर्थी की OMR शीट की कार्बन कॉपी को बताया गया है, जिसमें उत्तरों और अगले चरण के लिए चयन के बीच कथित विसंगति का दावा किया गया है।

पूरी परीक्षा प्रक्रिया की जांच की मांग

याचिकाकर्ता ने जांच को केवल किसी एक अभ्यर्थी या परीक्षा केंद्र तक सीमित न रखने की मांग की है। याचिका में प्रश्नपत्र तैयार करने, छपाई, सुरक्षित भंडारण, परिवहन, परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने, OMR शीट के संग्रह, स्कैनिंग, मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने तक पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।

CID जांच के बावजूद CBI जांच की मांग

JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड CID पहले से जांच कर रही है। सफल अभ्यर्थियों से OMR कार्बन कॉपी भी मांगी गई थी। इसके बावजूद याचिकाकर्ता ने मामले की जांच CBI से कराने की मांग की है।

अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की पहली सुनवाई पर है। अदालत इस मामले में क्या निर्देश देती है, इससे JPSC परीक्षा की आगे की प्रक्रिया को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।